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Sunday, May 22, 2022
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Poetry

” Read and visualize experiences in this beautiful journey of mine and others called Life! “

What am I in this world? A self reflecting question-answering poem on Environment Day

What am I in this world? I often ask myself. What is the purpose of my living?I try to address.Am I adding anything to the surrounding I live in, I wonder several times? Is this life being worth lived, all this...

Khamosh – खामोश

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चलो खामोश रहने का खेल खेलते हैं, हर लव्ज़ को कैद होने देते हैं,एक दूजे से ना कह कर मन की बात,मन को दबोच लेते हैं।खामोश रहने से शायद हमारे बीच का बैर दोस्ती में बदल जाये,खामोश रहने...

Hai Magar – है मगर

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है मगर, मुझसा दिखता तो है,पर मैं मुझसे कहीं खो गया है।है मगर,देखता सब कुछ है,मेहसूस भी करता है,पर मुझमें से मैं खो गया है।है मगर,सही राह चल रहा है,पर वो खास राह कहीं खो गया है।है मगर,कई...

Lockdown, Quarantine, Hum, Ghar aur Corona Warriors- Sandesh

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Who could have thought that such time would come when human beings would be caged in their own cage, by themselves. An invisible virus would make us realize each moment lived that far, sometimes with full awareness...

ये आँखें देखना चाहती हैं – Ye Aankhein Dekhna Chahti Hain

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https://www.facebook.com/mainedekhahai/videos/260385878441532/ रात को सोते वक़्त, अंधेरे कमरे में,जब आंखे जागती है,ख्याल इतने होते है,अपनी अपनी खुशी तराशती है। किसी को सोते वक़्त अगले दिन का नाश्ता क्या होगा ?ये ख्याल आता है,कोई कल सुबह तक भूक से मर ना...

Sunset Messages

Every sunset gives a new dream,A new hope,A new perspective,A new thought.It makes us believe how beautiful is life,And if we observe and live slowly and steadily, respectively,We tend to believe deep in our hearts,The value of...

मैंने देखा है

मैंने देखा है दिन को सांझ होते हुए, मैंने देखा है,  कली को फूल बनते हुए, मैंने देखा है, राह चलते मंजिल मिलते हुए, मैंने देखा है, इक्त्फाक होते हुए, वो बिन मौसम बरसात,...

हम काले क्यूं है?

Hum Kaale Kyun Hain ? By Shruti Bhargava, Maine Dekha Hai हम काले क्यूं है? सात रंगों के इन्द्रधनुष को देख,मुस्कुराहट कान से कान तक बंध जाती है,बारिश और सूरज की किरणों का जादू, सतरंगी एहसास जगाती है।कभी सोचा है,कि...

चाँद चाँद

कोई चाँद चाँद कहता रहा,कोई चाँद को अपना बना बैठा,कोई चाँद को तस्वीर में उतार चला,कोई चाँद को रस्मों में बांधता चला,कोई चाँद को देखने की फ़िराक में, बादलों को गले लगाता चला,कोई उड़ान भरता है ये...

Tum Tumhare Ho!

अगर बेताबियों के साथ हर पल गुज़रता है, अगर किसी के ना होने का दर्द तुम्हे भी होता है, अगर कुछ कर गुजरने का जज़्बा रखते हो तुम, अगर सच कहने से नहीं...

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