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Thursday, December 2, 2021
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Poetry

” Read and visualize experiences in this beautiful journey of mine and others called Life! “

Nature is my God and You are my preacher!

Nature is my God,And you are my preacher.I follow my God,And I find you,I follow my intuition,And I find the way,I leave everything on him,And I am guided to the core,I wish for the good for all,And...

मैंने देखा है

मैंने देखा है दिन को सांझ होते हुए, मैंने देखा है,  कली को फूल बनते हुए, मैंने देखा है, राह चलते मंजिल मिलते हुए, मैंने देखा है, इक्त्फाक होते हुए, वो बिन मौसम बरसात,...

बचपन में गर्मी की दोपहर

बरसों पहले जब गर्मी का मौसम आता था ,बचपन क्या मज़े उठाता था ,भीग जाती थी मासूम सी सूरत,उस गीलेपन में खेल खिलाता था,माँ कहती थी -‘चल आ मदद कर हमारी’,छत की तपती ज़मीन पे, आलू के पापड़...

कुछ नहीं

वो रूठा होता है (मनाने का इंतज़ार कर रहा होता है),कभी संकोच में, उलझा होता है, कभी बयान ना हो पा रहे जज़्बात में,झूमता है हंसी के साथ, कभी असीम ख़ुशी में,अधूरा होता है, कभी अपने ही...

चाँद चाँद

कोई चाँद चाँद कहता रहा,कोई चाँद को अपना बना बैठा,कोई चाँद को तस्वीर में उतार चला,कोई चाँद को रस्मों में बांधता चला,कोई चाँद को देखने की फ़िराक में, बादलों को गले लगाता चला,कोई उड़ान भरता है ये...

भीगी बारिश

आज बारिश का नया रूप देखा,कुछ अलग नहीं था, पर क्या खूब देखा,पत्तों की हरी मुस्कराहट झूमती हुई,झिम झिम करती आवाज़ धरती की गोद कर चूमती हुई।बचपन के कदम, मस्ती में बढ़ते हुए,कुछ और नहीं तो माटी से...

“हाँ है”

समझते भी हो,इतराते भी,लफ़्ज़ों की लड़ी है साथ,साथ है ख़ामोशी की खंकार भी,मनाते भी हो,छेड़ने का कोई अवसर गंवाते भी नहीं,फिक्र करते हो,‘नहीं तो’ कहने से कतराते भी नहीं,हर कदम साथ हो,नाराज़ होने पर, चेहरे की  अभिव्यक्ति...

नारी – Naari

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https://www.facebook.com/mainedekhahai/posts/1033524893729827?comment_id=1034228023659514&notif_id=1590834018808615&notif_t=feed_comment नारी हूं,और नर पहले,सफल हूं अपनी परिभाषा में,संतुष्ट भी साकार किए हुए सपनों में।टूटती हूं और चकनाचूर हो जाती हूं,खुद को समेट लेती हूं, अचंभा हो जाती हूं।संक्षेप हूं और विस्तार भी,कश्ती हूं और तूफान भी,बिखरती हूं...

ख्वाइशें – Khwaishein

हकीकत जैसी भी हो,ख्वाब अद्भुत है।  इन ख्वाबों से कहो,मेरी ख्वाइशों से रोज़ मिला करें,जैसे ही पूरी होती है,बदल जाती हैं।  बदलती है, अपने रूप,अपने आकार में,अपनी खुशबू में,अपने आकाश में,फिर भी मेरी ही है,बेहद अपनी सी है।बदलती...

हम काले क्यूं है?

Hum Kaale Kyun Hain ? By Shruti Bhargava, Maine Dekha Hai हम काले क्यूं है? सात रंगों के इन्द्रधनुष को देख,मुस्कुराहट कान से कान तक बंध जाती है,बारिश और सूरज की किरणों का जादू, सतरंगी एहसास जगाती है।कभी सोचा है,कि...

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