Tag: Poetry

ख्वाब

ख्वाब भी क्या खूब जरिया है, तुझ तक पहुँचने का, कि जब कभी हक़ीक़त जुदा करती है हमे , हम तेरे ख्वाबों की चादर ओढ़ लेते हैं।

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“हाँ है”

समझते भी हो, इतराते भी, लफ़्ज़ों की लड़ी है साथ, साथ है ख़ामोशी की खंकार भी, मनाते भी हो, छेड़ने का कोई अवसर गंवाते भी नहीं, फिक्र करते हो, ‘नहीं तो’ कहने से कतराते भी नहीं, हर कदम साथ हो, नाराज़ होने पर, चेहरे की  अभिव्यक्ति छिपाते भी नहीं, छिप कर हमारे साथ होने की […]

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कुछ नहीं

वो रूठा होता है (मनाने का इंतज़ार कर रहा होता है), कभी संकोच में, उलझा होता है, कभी बयान ना हो पा रहे जज़्बात में, झूमता है हंसी के साथ, कभी असीम ख़ुशी में, अधूरा होता है, कभी अपने ही बनाये भ्रम में, मुस्कुराता है, खिलखिलाता है अक्सर ये ‘कुछ नहीं’ ये ‘कुछ नहीं’, कहना… […]

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तेरी मर्ज़ी

तेरी मर्ज़ी ही है, जो आज आप और हम संग हैं, मृगतृष्णा (mirage) जो दिखी, उसे तेरी मर्ज़ी समझ वो पल भी सुकून से जीया है.

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बचपन में गर्मी की दोपहर

बरसों पहले जब गर्मी का मौसम आता था , बचपन क्या मज़े उठाता था , भीग जाती थी मासूम सी सूरत, उस गीलेपन में खेल खिलाता था, माँ कहती थी -‘चल आ मदद कर हमारी’, छत की तपती ज़मीन पे, आलू के पापड़ बिछाता था, धूप – छाँव खेल सा लगता था, एक पाँव के […]

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[mainedekhahai]