Category: Poetry

कुछ नहीं

वो रूठा होता है (मनाने का इंतज़ार कर रहा होता है), कभी संकोच में, उलझा होता है, कभी बयान ना हो पा रहे जज़्बात में, झूमता है हंसी के साथ, कभी असीम ख़ुशी में, अधूरा होता है, कभी अपने ही बनाये भ्रम में, मुस्कुराता है, खिलखिलाता है अक्सर ये ‘कुछ नहीं’ ये ‘कुछ नहीं’, कहना… […]

Read More
  • 17
  • 463
  • 2

तेरी मर्ज़ी

तेरी मर्ज़ी ही है, जो आज आप और हम संग हैं, मृगतृष्णा (mirage) जो दिखी, उसे तेरी मर्ज़ी समझ वो पल भी सुकून से जीया है.

Read More
  • 17
  • 145
  • 0

बचपन में गर्मी की दोपहर

बरसों पहले जब गर्मी का मौसम आता था , बचपन क्या मज़े उठाता था , भीग जाती थी मासूम सी सूरत, उस गीलेपन में खेल खिलाता था, माँ कहती थी -‘चल आ मदद कर हमारी’, छत की तपती ज़मीन पे, आलू के पापड़ बिछाता था, धूप – छाँव खेल सा लगता था, एक पाँव के […]

Read More
  • 5
  • 287
  • 0

मैंने देखा है

      मैंने देखा है,     दिन को सांझ होते हुए,     मैंने देखा है,     कली को फूल बनते हुए,     मैंने देखा है,     राह चलते मंजिल मिलते हुए,     मैंने देखा है,     इक्त्फाक होते हुए,     वो बिन मौसम बरसात,     […]

Read More
  • 20
  • 536
  • 3