Category: Hindi Poems

भीगी बारिश

आज बारिश का नया रूप देखा, कुछ अलग नहीं था, पर क्या खूब देखा, पत्तों की हरी मुस्कराहट झूमती हुई, झिम झिम करती आवाज़ धरती की गोद कर चूमती हुई। बचपन के कदम, मस्ती में बढ़ते हुए, कुछ और नहीं तो माटी से एक दूजे को रंगते हुए, बचपन की एक याद चली आई, कागज़ […]

Read More
  • 31
  • 484
  • 0

चाँद चाँद

कोई चाँद चाँद कहता रहा, कोई चाँद को अपना बना बैठा, कोई चाँद को तस्वीर में उतार चला, कोई चाँद को रस्मों में बांधता चला, कोई चाँद को देखने की फ़िराक में, बादलों को गले लगाता चला, कोई उड़ान भरता है ये सोच के, की एक दिन तो चाँद को पायेगा, कोई खुद  को चाँद […]

Read More
  • 33
  • 363
  • 0

“हाँ है”

समझते भी हो, इतराते भी, लफ़्ज़ों की लड़ी है साथ, साथ है ख़ामोशी की खंकार भी, मनाते भी हो, छेड़ने का कोई अवसर गंवाते भी नहीं, फिक्र करते हो, ‘नहीं तो’ कहने से कतराते भी नहीं, हर कदम साथ हो, नाराज़ होने पर, चेहरे की  अभिव्यक्ति छिपाते भी नहीं, छिप कर हमारे साथ होने की […]

Read More
  • 31
  • 437
  • 0

कुछ नहीं

वो रूठा होता है (मनाने का इंतज़ार कर रहा होता है), कभी संकोच में, उलझा होता है, कभी बयान ना हो पा रहे जज़्बात में, झूमता है हंसी के साथ, कभी असीम ख़ुशी में, अधूरा होता है, कभी अपने ही बनाये भ्रम में, मुस्कुराता है, खिलखिलाता है अक्सर ये ‘कुछ नहीं’ ये ‘कुछ नहीं’, कहना… […]

Read More
  • 30
  • 846
  • 2

बचपन में गर्मी की दोपहर

बरसों पहले जब गर्मी का मौसम आता था , बचपन क्या मज़े उठाता था , भीग जाती थी मासूम सी सूरत, उस गीलेपन में खेल खिलाता था, माँ कहती थी -‘चल आ मदद कर हमारी’, छत की तपती ज़मीन पे, आलू के पापड़ बिछाता था, धूप – छाँव खेल सा लगता था, एक पाँव के […]

Read More
  • 9
  • 566
  • 0

मैंने देखा है

      मैंने देखा है,     दिन को सांझ होते हुए,     मैंने देखा है,     कली को फूल बनते हुए,     मैंने देखा है,     राह चलते मंजिल मिलते हुए,     मैंने देखा है,     इक्त्फाक होते हुए,     वो बिन मौसम बरसात,     […]

Read More
  • 30
  • 1139
  • 5

[mainedekhahai]