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Thursday, July 16, 2020
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Poetry

” Read and visualize experiences in this beautiful journey of mine and others called Life! “

हम काले क्यूं है?

Hum Kaale Kyun Hain ? By Shruti Bhargava, Maine Dekha Hai हम काले क्यूं है? सात रंगों के इन्द्रधनुष को देख,मुस्कुराहट कान से कान तक बंध जाती है,बारिश और सूरज की किरणों का जादू, सतरंगी एहसास जगाती है।कभी सोचा है,कि...

बचपन में गर्मी की दोपहर

बरसों पहले जब गर्मी का मौसम आता था ,बचपन क्या मज़े उठाता था ,भीग जाती थी मासूम सी सूरत,उस गीलेपन में खेल खिलाता था,माँ कहती थी -‘चल आ मदद कर हमारी’,छत की तपती ज़मीन पे, आलू के पापड़...

काश – Kaash

Kaash - A poem by Shruti काश मैं वो चांद होता जिसे छूने को वो अटल हो सके, काश मैं वो फूल होता जिसकी खुशबू सांसों में बस सके, काश मैं वो भूल होता, जिसे कभी...

Expectation

'Expectation' - A poem by Shruti There is a strong belief for some goodness to arrive, There is a voice inside us which tells us to stay alive, There is a walk which we have been enjoying...

ख्वाइशें – Khwaishein

हकीकत जैसी भी हो,ख्वाब अद्भुत है।  इन ख्वाबों से कहो,मेरी ख्वाइशों से रोज़ मिला करें,जैसे ही पूरी होती है,बदल जाती हैं।  बदलती है, अपने रूप,अपने आकार में,अपनी खुशबू में,अपने आकाश में,फिर भी मेरी ही है,बेहद अपनी सी है।बदलती...

नारी – Naari

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https://www.facebook.com/mainedekhahai/posts/1033524893729827?comment_id=1034228023659514&notif_id=1590834018808615&notif_t=feed_comment नारी हूं,और नर पहले,सफल हूं अपनी परिभाषा में,संतुष्ट भी साकार किए हुए सपनों में।टूटती हूं और चकनाचूर हो जाती हूं,खुद को समेट लेती हूं, अचंभा हो जाती हूं।संक्षेप हूं और विस्तार भी,कश्ती हूं और तूफान भी,बिखरती हूं...

ये आँखें देखना चाहती हैं – Ye Aankhein Dekhna Chahti Hain

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https://www.facebook.com/mainedekhahai/videos/260385878441532/ रात को सोते वक़्त, अंधेरे कमरे में,जब आंखे जागती है,ख्याल इतने होते है,अपनी अपनी खुशी तराशती है। किसी को सोते वक़्त अगले दिन का नाश्ता क्या होगा ?ये ख्याल आता है,कोई कल सुबह तक भूक से मर ना...

Hai Magar – है मगर

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है मगर, मुझसा दिखता तो है,पर मैं मुझसे कहीं खो गया है।है मगर,देखता सब कुछ है,मेहसूस भी करता है,पर मुझमें से मैं खो गया है।है मगर,सही राह चल रहा है,पर वो खास राह कहीं खो गया है।है मगर,कई...

Lockdown, Quarantine, Hum, Ghar aur Corona Warriors- Sandesh

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Who could have thought that such time would come when human beings would be caged in their own cage, by themselves. An invisible virus would make us realize each moment lived that far, sometimes with full awareness...

Maa – माँ

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Hello की tone से समझ जाती है, मेरे मन की खलबली को, चुप रहूं, तो भाप लेती है, मेरे दिल में उभर रही तरंगों को,ऊंची आवाज़ में मैं कभी जो बोल देती हूं उससे, समझ जाती...

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